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रामनवमी पर रामकथा मन्दाकिनी शोभायात्रा दिनांक 30 मार्च 2023 को सायंकाल 4:00 बजे से तुलसीघाट से निकलेगी

वाराणसी | भारत में शोभायात्राओं की परंपरा बहुत पुरानी है जिसकाशी में गंगा तट के तुलसी घाट पर रामचरित मानस जैसे महान ग्रन्थ का सृजन हुआ हो. ऐसी नगरी में रामनवमी के दिन माँ गंगा की आँचल पर “रामकथा मन्दाकिनी शोभयात्रा” का तुलसी घाट से ही वार्षिक आयोजन अपने औचित्य एवं सार्थकता को स्वयं प्रमाणित करता है। इस शोभायात्रा के माध्यम से महादेव की नगरी काशी के श्रद्धालु भगवान श्री राम का साक्षात्कार करते हैं, उनके मर्यादित जीवन को अंगीकार करते हैं।

वर्ष 1988 में जब “रामायण” की धारावाहिक के रूप लोकप्रियता से पूरा भारतवर्ष राममय हो गया था, उस समय काशी की धर्म परायण जनता को अवसर प्राप्त हुआ रामायण को जीवंत करने वाले कलाकारों के स्वागत एवं अभिनन्दन का भारत विकास परिषद् के नेतृत्व में “श्री रामकथा मन्दाकिनी शोभायात्रा” गंगा की लहरों पर बजड़े में राम दरबार की भव्य झांकी सजाकर निकाली गई, जिसके तुलसी घाट से प्रारंभी होकर प्रह्लाद घाट पहुंचने तक सभी घाटों पर लाखों की संख्या में काशी की जनता ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ महादेव के आराध्य का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। उसी समय से प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की रामनवमी के पावन पर्व पर रामकथा मन्दाकिनी शोभायात्रा का आयोजन होता रहा है।

श्रीराम ने केवट, शबरी, निषाद आदि को सम्मान देकर जन्म और जाति के आधार पर ऊँच-नीच की अन्याय मूलक मान्यताओं का उन्मूलन किया, जिसका पालन समिति द्वारा केवट बंधुओं को केसरिया साफा बांधकर किया जाता है। साथ ही गंगा के निर्मलीकरण और अवरिलता एवं घाटों की स्वच्छता का सन्देश भी इसी शोभायात्रा के माध्यम से प्रचारित किया जाता है। अपनी संस्कृति एवं माँ गंगा के महत्व से नई पीढ़ी को अवगत कराने के लिए प्रहलाद घाट पर बच्चों द्वारा प्रभु के स्वागत में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कराई जाती है जो बाल मन में संस्कारों की अमिट छवि जागृत करती है। कार्यक्रम के समापन से पूर्व विशिष्टजनों का सम्मान एवं तीन श्रेष्ठ झांकियों को पुरस्कृत किया जाता है।

इस वर्ष श्री रामनवमी पर रामकथा मन्दाकिनी शोभायात्रा दिनांक 30 मार्च 2023 को सायंकाल 4:00 बजे से तुलसीघाट से निकलेगी । निवेदन है कि शोभायात्रा की आरती करने का सौभाग्य एवं पुण्य लाभ का अवसर प्राप्त करें।

सादर,

नवीन कुमार श्रीवास्तव उपाध्यक्ष

सहयोगी:

ज्ञानेश्वर जायसवाल, हरीश वालिया, चन्द्रशेखर कपूर, मनीष खत्री, डॉ० कमलेश कुमार तिवारी, डॉ० शिशिर मालवीय

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